Poster

Upanishad and Wisdom

Discourses on Scriptures, Saints and Spiritual Topics in Hindi and English. Length: 8-14 hours.

All Upanishad and Wisdom Courses

सर्वसार उपनिषद्

सभी उपनिषदों का सार

"उपनिषद् पढ़ना तो चाहते हैं पर शुरुआत कहाँ से करें?" सर्वसार से करें! 108 उपनिषदों में यह उपनिषद् इसलिए प्रख्यात है क्योंकि इसमें सभी उपनिषदों का सार पाया जाता है। मात्र 21 श्लोकों में यह ग्रन्थ वैदिक ऋषियों के गूढ़ ज्ञान को अपने में समाय हुए है। उपनिषदों के करीब आएं आचार्य प्रशांत के साथ इस आसान वीडियो कोर्स के माध्यम से।

Enroll Details >>

कठ उपनिषद्

नचिकेता-यमराज संवाद की सहायता से समझें मृत्यु व अमरत्व को

कठ उपनिषद् के बालक नचिकेता के विवेक व साहस को आज भी याद किया जाता है। शास्त्रों के अध्ययन के दौरान अनेकों संवाद सामने आते हैं परंतु स्वयं मृत्युदेव यमराज के साथ बालक नचिकेता का यह संवाद अद्वितीय है। जानिए अमरता और आत्मज्ञान के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ ‘कठ उपनिषद्’ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

श्रीमद्भगवद्गीता (भाग - १)

सम्पूर्ण ग्रंथ की सरल व समसामयिक व्याख्या

विश्वभर में श्रीमद्भगवद्गीता को अध्यात्म का पर्याय माना जाता है। यहाँ तक कहा गया है कि जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर इस ग्रंथ में समाहित है। वैसे तो यह ग्रंथ हज़ारों वर्ष पुराना है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गई व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत सरल व प्रासंगिक बना देती है। श्रीमद्भगवद्गीता के प्रकाश में अपने जीवन को एक नई दिशा दीजिए आचार्य प्रशांत के साथ अध्याय १ से ४ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

श्रीमद्भगवद्गीता (भाग - २)

सम्पूर्ण ग्रंथ की सरल व समसामयिक व्याख्या

विश्वभर में श्रीमद्भगवद्गीता को अध्यात्म का पर्याय माना जाता है। यहाँ तक कहा गया है कि जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर इस ग्रंथ में समाहित है। वैसे तो यह ग्रंथ हज़ारों वर्ष पुराना है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गई व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत सरल व प्रासंगिक बना देती है। श्रीमद्भगवद्गीता के प्रकाश में अपने जीवन को एक नई दिशा दीजिए आचार्य प्रशांत के साथ अध्याय ५ से ८ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

श्रीमद्भगवद्गीता (भाग - ३)

सम्पूर्ण ग्रंथ की सरल व समसामयिक व्याख्या

विश्वभर में श्रीमद्भगवद्गीता को अध्यात्म का पर्याय माना जाता है। यहाँ तक कहा गया है कि जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर इस ग्रंथ में समाहित है। वैसे तो यह ग्रंथ हज़ारों वर्ष पुराना है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गई व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत सरल व प्रासंगिक बना देती है। श्रीमद्भगवद्गीता के प्रकाश में अपने जीवन को एक नई दिशा दीजिए आचार्य प्रशांत के साथ अध्याय ९ से १२ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

श्रीमद्भगवद्गीता (भाग - ४)

सम्पूर्ण ग्रंथ की सरल व समसामयिक व्याख्या

विश्वभर में श्रीमद्भगवद्गीता को अध्यात्म का पर्याय माना जाता है। यहाँ तक कहा गया है कि जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर इस ग्रंथ में समाहित है। वैसे तो यह ग्रंथ हज़ारों वर्ष पुराना है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गई व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत सरल व प्रासंगिक बना देती है। श्रीमद्भगवद्गीता के प्रकाश में अपने जीवन को एक नई दिशा दीजिए आचार्य प्रशांत के साथ अध्याय १३ से १८ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

कर्मयोग

श्रीमद्भगवद्गीता के तीसरे अध्याय पर आधारित

आज के युग में श्री कृष्ण का कर्मयोग जितना प्रासंगिक है शायद उतना कभी नहीं था। श्री कृष्ण कहते हैं कि हमारा अधिकार सिर्फ कर्म करने पर है उसके फल पर नहीं, परंतु ऐसा जीवन में घटित होता महसूस नहीं होता। जानिए वास्तविक कर्मयोग और उसकी जीवन में सार्थकता को आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ के तीसरे अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

भक्ति व् पुरुषोत्तम योग

श्रीमद्भगवद्गीता गीता प्रवचनमाला

आज के युग में ‘भक्त’ शब्द मानिए जैसे अंधविश्वास व अपमान का पर्याय बन चुका है। मीरा की कृष्ण भक्ति, तुलसी की राम उपासना इस काल में असंभव-सी मालूम होती है। साथ ही, भक्ति व पुरूषार्थ दो कभी न मिलने वाली रेखाओं-से लगते हैं। असली भक्ति व पुरूषार्थ के संगम के करीब आयें आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ के बारहवें और पंद्रहवें अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

अष्टावक्र गीता

जानें 'जीवन्मुक्त' होने का वास्तविक अर्थ

मनीषियों की मानें तो श्रीमद्भगवद्गीता से भी अधिक शुद्ध ज्ञान की यदि कहीं वर्षा हुई है तो वो है श्रीअष्टावक्र - श्रीजनक संवाद। कैसे एक प्राज्ञ किशोर और एक जीवनमुक्त पराक्रमी राजा के बीच मार्मिक-संवाद घटित होता है वो अद्भुत है। जानिए ‘तत्त्वज्ञ पुरुष’ के लक्षणों को आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्री अष्टावक्र गीता’ के अट्ठारहवें अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

तत्त्वबोध

आदि शंकराचार्य जी के वचनों में अद्वैत वेदांत का सार

वेदांत को वेदों का शिखर, तो अद्वैत वेदांत को भारतीय दर्शन का सिरमौर कहा गया है। इसी दर्शन में गहरे उतरने से पूर्व तत्त्वबोध, आत्मबोध, और अपरोक्षानुभूति जैसे 'प्रकरण ग्रंथों' का पाठ अनिवार्य है। जानिए अद्वैत वेदांत के सार को आचार्य प्रशांत के साथ आदि शंकराचार्य कृत 'तत्त्वबोध' पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

आत्मबोध

आदि शंकराचार्य जी के वचनों में अद्वैत वेदांत का सार

वेदांत को वेदों का शिखर, तो अद्वैत वेदांत को भारतीय दर्शन का सिरमौर कहा गया है। इसी दर्शन में गहरे उतरने से पूर्व तत्त्वबोध, आत्मबोध, और अपरोक्षानुभूति जैसे 'प्रकरण ग्रंथों' का पाठ अनिवार्य है। जानिए अद्वैत वेदांत के सार को आचार्य प्रशांत के साथ आदि शंकराचार्य कृत 'आत्मबोध' पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

अपरोक्षानुभूति

आदि शंकराचार्य जी के वचनों में अद्वैत वेदांत का सार

वेदांत को वेदों का शिखर, तो अद्वैत वेदांत को भारतीय दर्शन का सिरमौर कहा गया है। इसी दर्शन में गहरे उतरने से पूर्व तत्त्वबोध, आत्मबोध, और अपरोक्षानुभूति जैसे 'प्रकरण ग्रंथों' का पाठ अनिवार्य है। जानिए अद्वैत वेदांत के सार को आचार्य प्रशांत के साथ आदि शंकराचार्य कृत 'अपरोक्षानुभूति' पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

योगवाशिष्ठ सार

श्री राम और ऋषि वासिष्ठ के सारगर्भित संवाद का सार

किशोरावस्था में पिता दशरथ के साथ देशभर में तीर्थ यात्रा उपरांत जब श्री राम को वैराग्य प्राप्त हुआ तो राजा दशरथ चिंतित हो गए और तब श्री राम के प्रश्नों का उत्तर देने स्वयं ऋषि वासिष्ठ आए। इस समय ऋषि वासिष्ठ द्वारा दिए गए उपदेश को 'योगवासिष्ठ' कहा गया। जानिए ऋषि वासिष्ठ द्वारा दिए गए उपदेश के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ ‘योगवासिष्ठ सार’ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

स्वामी विवेकानंद और व्यवहारिक वेदांत

स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु श्री रामकृष्ण का जीवन व दर्शन

आज के युग में वेदांत के प्रसार और प्रचार में स्वामी विवेकानंद जी का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने देशाटन कर आमजनमानस में उनके स्वर्णिम इतिहास के प्रति जागरूकता फैलाई, साथ ही विश्वभर को वेदांत और सनातन धर्म के जीवनदायी दर्शन से भी परिचित करवाया। जानिए स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण के जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से और स्वामी विवेकानंद के व्यवहारिक वेदांत को आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

कबीर साहब

कबीर साहब की साखियों और भजनों पर आधारित

संत कबीर के साथ हमारा पहला परिचय अक्सर विद्यालय में होता है। वहाँ हमने कबीर साहब को एक नैतिक, मधुर, और सुसज्जित कवि के रूप में देखा होता है जिसकी वाणी सामाजिक धारणाओं से मेल रखती है। लेकिन दूसरी ओर कबीर साहब का एक विराट रूप भी है, जो अहंकार को कहीं छिपने की जगह भी नहीं देता। जानिए उनके इस विराट् रूप को आचार्य प्रशांत के साथ संत कबीर के ‘बीजक ग्रंथ’ के चुनिंदा दोहों पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

काम तो राम ही आएँगे!

जानें श्रीराम के मर्म को

राम को जानते भी हैं हम? राम का नाम तो सभी लेते हैं, पर उन्हें जानते कितने हैं? राम जो भगवान भी हैं, और इंसान भी। राम, जो ऊँचाईयों की प्रेरणा भी देते हैं, और राम, जो आज स्वयं कठघरे में खड़े हैं। ऐसे समय में श्री राम को सही और साफ़ जानने का महत्व और बढ़ जाता है। समझिए श्री राम और उनके जीवन के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ - श्रीरामचरितमानस पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

भागवत पुराण

जीवन का समग्र दर्शन श्रीकृष्ण के साथ

श्री कृष्ण को ईश्वर का पूर्ण अवतार कहा जाता है। एक ओर श्री कृष्ण की गीता को प्रस्थानत्रयी में उपनिषद व ब्रह्मसूत्र के समकक्ष रखा जाता है, तो दूसरी ओर श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को हम आज भी याद करते हैं। जानिए श्री कृष्ण और उनके जीवन को समग्रता में आचार्य प्रशांत के साथ ‘भागवत पुराण’ के चुनिंदा प्रकरणों पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Upcoming Details >>

महाभारत

जीवन का सार, महाभारत की कहानियों के साथ

महाभारत सिर्फ एक महाकाव्य नहीं है परंतु जीवन-दर्शन का एक विराट संग्रह है। महाभारत का अध्ययन व्यक्ति को काम, अर्थ, धर्म और मोक्ष की जीवन में सही जगह समझने में सहायक होता है। जानिए जीवन जीने की कला आचार्य प्रशांत के साथ महाभारत के विशेष प्रकरणों पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

श्री भर्तृहरि

काम से राम तक

राजा भर्तृहरि उज्जैन के अधिपति थे। वह एक विलक्षण कवि और राजनीतिज्ञ थे। लेकिन उन दिनों उनकी कामुकता भी प्रबल थी, वह अपनी पत्नी व अन्य स्त्रियों के मोह से ग्रस्त थे। एक दिन जब उन्हें पूर्ण रूप से पता चला कि जिस रानी को वह अपने प्राणों से भी प्रिय समझते हैं, वह कोतवाल के प्रेम में डूबी है, तो उन्हें वैराग्य हो गया। उसके बाद ही उन्होंने वैराग्य पर सौ श्लोक लिखे, जो कि आज वैराग्य शतक के नाम से प्रसिद्ध हैं। जानिए वैराग्य शतक के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ बाबा भर्तृहरि पर आधारित बोधशाला में।

Enroll Details >>

सूफ़ीनामा

इश्क़-ए-मिजाज़ी से इश्क़-ए-हक़ीक़ी की ओर

सूफी संतों ने हमेशा ख़ुदा को किसी ऊँचें शिखर पर न बैठाकर अपना यार या प्रेमी बताया है। उनका अपने वली या गुरु के लिए प्रेम (इश्क़-ए-मिजाज़ी) ही खुदा के प्रेम (इश्क़-ए-हक़ीक़ी) तक पहुँचने के लिए एक सीढ़ी की तरह सहायक रहा है। इसी मार्ग की एक झलक मिलती है उनकी रचनाओं व कथाओं में। जानिए सूफियों के मार्ग को आचार्य प्रशांत के साथ सूफी कथाओं पर आधारित बोधशाला में।

Enroll Details >>

ज़ेन बोध-कथाएं

एक हाथ की ताली

बोधिधर्म जब भारत से चीन गए, तो उनकी शिक्षाओं से प्रेरित हुई बौद्धधर्म की 'चान' (ध्यान) शाखा, जो समय के साथ जब जापान पहुँची तो जानी गई 'ज़ेन' के नाम से। अपनी इस पूरी यात्रा में इस दर्शनपध्दति का प्रारूप तो बदला पर इसकी धार और तीख़ी हो गई। ज़ेन गुरुओं के तरीके बड़े अनोखे हैं, यह इतने सरल व सहज हैं कि मनुष्य की मानिसक चालाकी को इनके आगे कोई ठौर नहीं मिलता। जानिए ज़ेन की तीखी धार को आचार्य प्रशांत के साथ ज़ेन बोध-कथाओं पर आधारित बोधशाला में।

Enroll Details >>

संतवाणी (भाग - १)

संतों के वचनों का अनूठा संगम व समसामयिक अर्थ

जब-जब समाज में धर्म के प्रति अनादर बड़ा है और आम-आदमी की चेतना को पाखंड ने घेरा है, तब-तब संतों ने अपने वचनों से हमारे मन को शीतलता प्रदान की है और सामाजिक चेतना को शुद्ध किया है। इस श्रृंखला में आचार्य जी ने संत कबीरदास, तुलसीदास, पलटूदास, दादू दयाल, सहजोबाई, मलूकदास, दरियादास आदि संतों की वाणी पर चर्चा की है। जानिए उनके वचनों की जीवन में सार्थकता को आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

संतवाणी (भाग - २)

संतों के वचनों का अनूठा संगम व समसामयिक अर्थ

जब-जब समाज में धर्म के प्रति अनादर बड़ा है और आम-आदमी की चेतना को पाखंड ने घेरा है, तब-तब संतों ने अपने वचनों से हमारे मन को शीतलता प्रदान की है और सामाजिक चेतना को शुद्ध किया है। इस श्रृंखला में आचार्य जी ने संत कबीरदास, तुलसीदास, पलटूदास, दादू दयाल, सहजोबाई, मलूकदास, दरियादास आदि संतों की वाणी पर चर्चा की है। जानिए उनके वचनों की जीवन में सार्थकता को आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

बुल्हे नूं समझावण आइयां

बाबा बुल्लेशाह संग इश्क़ की डुबकी

बाबा बुल्लेशाह जी का काव्य जितना प्रेमपूर्ण, रसपूर्ण, प्रेरणादायक एवं विराट है उतना ही उनका जीवन। एक ओर इश्क़ की गहराई तो दूसरी ओर आम जन को छूने वाला काव्य।
गहराई से समझें बाबा बुल्लेशाह जी के जीवन और काव्य को अपने जीवन के उच्चतम शिखर के रूप में और लगाएं इश्क़ की डुबकी आचार्य प्रशांत संग ‘बाबा बुल्लेशाह’ पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

यीशु मसीह का संदेश

यीशु मसीह की शिक्षाएं वेदांत के प्रकाश में

एक धार्मिक शख्सियत होने से पहले यीशु मसीह एक संत व विद्रोही हैं, जिन्होंने न सिर्फ लोगों को जीवनदायी शिक्षा दी, साथ ही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ भी उठाई। उनकी शिक्षओं को और भी गहराई प्राप्त होती है जब उन्हें वेदांत के प्रकाश में समझा जाता है। जानिए यीशु मसीह की शिक्षओं को और गहराई से वेदांत के प्रकाश में आचार्य प्रशांत के साथ 'न्यू टेस्टामेंट' के कुछ चुनिंदा अंशों पर आधारित इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

माटी में आकाश (भाग - १)

लोकप्रिय गीतों के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ

भारत में सभी कलाओं में सबसे ऊँचा स्थान संगीत को दिया गया है। वेद हों, या पुराण, या फिर इतिहास ग्रंथ जैसे रामायण और महाभारत, सभी को खास तरह के गीतों के रूप में ही रचा गया था। लेकिन आज के भारत में संगीत की अभिव्यक्ति विकृत हो चुकी है, ऐसे में ज़रूरी है कि इस युग में लिखे गए ऐसे गीत जिनका हृदय मूलतः आध्यात्मिक है उनको ढूंढा जाए और उनके वास्तविक अर्थों को समझा जाए। जानिए कुछ ख़ास बॉलीवुड गीतों, गज़लों व कविताओं के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

माटी में आकाश (भाग - २)

लोकप्रिय गीतों के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ

भारत में सभी कलाओं में सबसे ऊँचा स्थान संगीत को दिया गया है। वेद हों, या पुराण, या फिर इतिहास ग्रंथ जैसे रामायण और महाभारत, सभी को खास तरह के गीतों के रूप में ही रचा गया था। लेकिन आज के भारत में संगीत की अभिव्यक्ति विकृत हो चुकी है, ऐसे में ज़रूरी है कि इस युग में लिखे गए ऐसे गीत जिनका हृदय मूलतः आध्यात्मिक है उनको ढूंढा जाए और उनके वास्तविक अर्थों को समझा जाए। जानिए कुछ ख़ास बॉलीवुड गीतों, गज़लों व कविताओं के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>

पंचतंत्र

रोचक कहानियों में छिपे जीवनदायी सूत्र

कहानियाँ हमेशा से मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करती आई हैं। लेकिन जब कहानियाँ पंचतंत्र की हों तो बात और गहरी हो जाती है। लगभग दो हज़ार साल पहले संकलित की गई इन कहानियों से हमारा परिचय बचपन में ही हो जाता है परंतु शायद ही कभी उन सरल कहानियों और अनूठे किरदारों के पीछे छिपे गूढ़ आध्यात्मिक मायनों को हम पहचान पाते हैं। जानिए पंचतंत्र को बिल्कुल नए रूप में आचार्य प्रशांत के साथ इस बोधशाला में।

Enroll Details >>