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Shastra Kaumudi

Discourses on Scriptures, Saints and Spiritual Topics in Hindi and English. Length: 8-14 hours.

All Shastra Kaumudi Courses

कबीर साहब

कबीर साहब की साखियों और भजनों पर आधारित

संत कबीर के साथ हमारा पहला परिचय अक्सर विद्यालय में होता है। वहाँ हमने कबीर साहब को एक नैतिक, मधुर, और सुसज्जित कवि के रूप में देखा होता है जिसकी वाणी सामाजिक धारणाओं से मेल रखती है। लेकिन दूसरी ओर कबीर साहब का एक विराट रूप भी है, जो अहंकार को कहीं छिपने की जगह भी नहीं देता। जानिए उनके इस विराट् रूप को आचार्य प्रशांत के साथ संत कबीर के ‘बीजक ग्रंथ’ के चुनिंदा दोहों पर आधारित इस बोधशाला में।

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कर्मयोग

श्रीमद्भगवद्गीता के तीसरे अध्याय पर आधारित

आज के युग में श्री कृष्ण का कर्मयोग जितना प्रासंगिक है शायद उतना कभी नहीं था। श्री कृष्ण कहते हैं कि हमारा अधिकार सिर्फ कर्म करने पर है उसके फल पर नहीं, परंतु ऐसा जीवन में घटित होता महसूस नहीं होता। जानिए वास्तविक कर्मयोग और उसकी जीवन में सार्थकता को आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ के तीसरे अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

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अष्टावक्र गीता

जानें 'जीवन्मुक्त' होने का वास्तविक अर्थ

मनीषियों की मानें तो श्रीमद्भगवद्गीता से भी अधिक शुद्ध ज्ञान की यदि कहीं वर्षा हुई है तो वो है श्रीअष्टावक्र - श्रीजनक संवाद। कैसे एक प्राज्ञ किशोर और एक जीवनमुक्त पराक्रमी राजा के बीच मार्मिक-संवाद घटित होता है वो अद्भुत है। जानिए ‘तत्त्वज्ञ पुरुष’ के लक्षणों को आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्री अष्टावक्र गीता’ के अट्ठारहवें अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

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कठ उपनिषद्

नचिकेता-यमराज संवाद की सहायता से समझें मृत्यु व अमरत्व को

कठ उपनिषद् के बालक नचिकेता के विवेक व साहस को आज भी याद किया जाता है। शास्त्रों के अध्ययन के दौरान अनेकों संवाद सामने आते हैं परंतु स्वयं मृत्युदेव यमराज के साथ बालक नचिकेता का यह संवाद अद्वितीय है। जानिए अमरता और आत्मज्ञान के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ ‘कठ उपनिषद्’ पर आधारित इस बोधशाला में।

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भक्ति व् पुरुषोत्तम योग

श्रीमद्भगवद्गीता गीता प्रवचनमाला

आज के युग में ‘भक्त’ शब्द मानिए जैसे अंधविश्वास व अपमान का पर्याय बन चुका है। मीरा की कृष्ण भक्ति, तुलसी की राम उपासना इस काल में असंभव-सी मालूम होती है। साथ ही, भक्ति व पुरूषार्थ दो कभी न मिलने वाली रेखाओं-से लगते हैं। असली भक्ति व पुरूषार्थ के संगम के करीब आयें आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ के बारहवें और पंद्रहवें अध्याय पर आधारित इस बोधशाला में।

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भागवत पुराण

जीवन का समग्र दर्शन श्रीकृष्ण के साथ

श्री कृष्ण को ईश्वर का पूर्ण अवतार कहा जाता है। एक ओर श्री कृष्ण की गीता को प्रस्थानत्रयी में उपनिषद व ब्रह्मसूत्र के समकक्ष रखा जाता है, तो दूसरी ओर श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को हम आज भी याद करते हैं। जानिए श्री कृष्ण और उनके जीवन को समग्रता में आचार्य प्रशांत के साथ ‘भागवत पुराण’ के चुनिंदा प्रकरणों पर आधारित इस बोधशाला में।

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योगवाशिष्ठ सार

श्री राम और ऋषि वासिष्ठ के सारगर्भित संवाद का सार

किशोरावस्था में पिता दशरथ के साथ देशभर में तीर्थ यात्रा उपरांत जब श्री राम को वैराग्य प्राप्त हुआ तो राजा दशरथ चिंतित हो गए और तब श्री राम के प्रश्नों का उत्तर देने स्वयं ऋषि वासिष्ठ आए। इस समय ऋषि वासिष्ठ द्वारा दिए गए उपदेश को 'योगवासिष्ठ' कहा गया। जानिए ऋषि वासिष्ठ द्वारा दिए गए उपदेश के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ ‘योगवासिष्ठ सार’ पर आधारित इस बोधशाला में।

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श्रीरामचरितमानस

जानें गोस्वामी तुलसीदास जी के राम को उन्हीं के शब्दों में

आधुनिक जगत के इस चुनौतीपूर्ण दौर में हम अक्सर एक प्रेरणा-स्रोत की खोज में लगे रहते हैं और ऐसे में श्री राम की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन ही उनका संदेश है। समझिए श्री राम और उनके जीवन के मर्म को आचार्य प्रशांत के साथ ‘श्रीरामचरितमानस’ के कुछ चुनिंदा प्रकरणों पर आधारित इस बोधशाला में।

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अपरोक्षानुभूति

आदि शंकराचार्य जी के वचनों में अद्वैत वेदांत का सार

वेदांत को वेदों का शिखर, तो अद्वैत वेदांत को भारतीय दर्शन का सिरमौर कहा गया है। इसी दर्शन में गहरे उतरने से पूर्व तत्त्वबोध, आत्मबोध, और अपरोक्षानुभूति जैसे 'प्रकरण ग्रंथों' का पाठ अनिवार्य है। जानिए अद्वैत वेदांत के सार को आचार्य प्रशांत के साथ आदि शंकराचार्य कृत 'अपरोक्षानुभूति' पर आधारित इस बोधशाला में।

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